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25 May 2023: दिन की पांच बड़ी ख़बरें 'Top 5 News Of The Day

 1. एचपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट हुआ घोषित, hpbose.org पर चेक करें नतीजे

हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के ओर से 12वीं रिजल्ट घोषित होने के बाद आज यानी 25 मई को दोपहर 2:30 बजे 10वीं कक्षा का रिजल्ट भी घोषित कर दिया गए है। परिणाम की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की गयी है जिसके बाद बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट hpbose.org पर रिजल्ट का लिंक एक्टिवेट हो गया है। स्टूडेंट्स आधिकारिक साइट पर जाकर रोल नंबर दर्ज करके अपने परिणाम चेक कर सकते हैं। रिजल्ट जारी होने के साथ बोर्ड की ओर से 10th में टॉप करने वाले स्टूडेंट्स की लिस्ट भी जारी की जाएगी।

HPBOSE 10th Result 2023: जारी हुए हिमाचल प्रदेश 10th रिजल्ट

हिमाचल प्रदेश 10th बोर्ड का रिजल्ट बस कुछ ही समय में जारी कर दिया जायेगा। रिजल्ट जारी होने से संबंधित सूचना बोर्ड की ओर जारी कर दी गयी है। छात्र-छात्राएं रिजल्ट घोषित होने पर ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करके अपने परिणाम की जांच कर सकेंगे।

HPBOSE 10th Result 2023: इन स्टेप्स से चेक करें रिजल्ट

हिमाचल प्रदेश बोर्ड 10th रिजल्ट प्राप्त करने के लिए स्टूडेंट्स को पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर आपको रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपको अगले पेज पर कक्षा 10वीं रिजल्ट से संबंधित लिंक दिखाई देगा जिस पर आपको क्लिक करना है। अगले पेज पर आपको अपना रोल नंबर भरकर सर्च बटन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपना परिणाम एक नयी विंडो पर ओपन हो जायेगा। अब आप अपने रिजल्ट की जांच के साथ इसको डाउनलोड करके प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं।

2.UPSC Topper की जाति...गूगल पर कर रही ट्रेंड: जाति विशेष संस्‍थान अपनी caste के कैंडिडेट्स के नाम कर रहे शेयर

बिहार के जाति आधारित समाज में महापुरुषों को जातियों के खांचे में बांधकर देखने का ट्रेंड पुराना है। विभिन्न क्षेत्रों में खास उपलब्धि हासिल करने वालों को भी अपनी जाति का बताने की होड़ मची रहती है। अब हाल ही में आए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की केंद्रीय सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Examination) के टॉपरों की जातियां भी खोजी जा रहीं हैं। इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर सर्च किए जाने वाले की-वर्ड्स तो यही बता रहे हैं।

सोशल मीडिया में टॉपरों की जाति बताते पोस्ट

मंगलवार को रिजल्ट आने के तत्काल बाद सोशल मीडिया में टॉपरों की जाति बताते हुए पोस्ट आने लगे थे। इंटरनेट पर उनकी जातियां जानने की मची होड़ के बीच कुछ लोग महज अनुमान के आधार पर उनकी जातियां लिखने लगे। जाति आधारित संगठनों के पोस्ट भी दिखने लगे थे।

गूगल पर ट्रेंड में टॉपरों की जातियों के की-वर्ड्स

इस बीच गूगल पर टॉपरों से संबंधित सर्च में उनकी जातियों से संबंधित की-वर्ड्स भी ट्रेंड करने लगे हैं। गुरुवार को गूगल पर ‘यूपीएससी टॉपर’ सर्च करने पर बढ़ते ट्रेंड में टॉप पर caste of ishita kishore upsc topper है। गुरुवार को ‘इशिता किशोर’ सर्च करने पर टॉप तीन की-वर्ड्स ishita kishore caste, kishore caste, ishita kishore caste in hindi हैं। आगे छठे स्थान पर भी ias ishita kishore caste तो 10वें स्थान पर caste  of ishita kishore upsc topper है।

इसी तरह गरिमा लोहिया को सर्च करने पर आठवें स्थान पर उम्र से संबंधित की-वर्ड garima lohia age है। उनका ‘लोहिया’ उपनाम मारवाड़ी होने की पुष्टि करता है, इसलिए जाति व समुदाय से संबंधित की-वर्ड टॉप 10 की-वर्ड्स में नहीं है। हालांकि, एक दिन पहले बुधवार को बिहार से संबंधित टॉपर्स को लेकर सर्च किए जा रहे ट्रेंड में ishita kishore caste category,  garima lohia caste category, kishore caste, ishita kishore caste, ishita kishore category शामिल रहे। 

3. चोल राजवंश, राजदंड, नेहरू और अब मोदी..., बीच में है लोकसभा की 39 सीटें

आजादी के 75 साल बाद राजदंड का प्रतीक सेंगोल राजनीतिक बहस के केंद्र में है. मोदी सरकार ने सेंगोल को संसद की नई बिल्डिंग में स्पीकर कुर्सी के पास रखने का फैसला किया है. सेंगोल चोल वंश के वक्त काफी प्रसिद्ध था और इसके बाद से ही तमिलनाडु की जनता से इसका भावनात्मक जुड़ाव है.  

संसद में सेंगोल लगाए जाने पर विवाद भी शुरू हो गया है. सपा सांसद एसटी हसन ने कहा- एक धर्म का धार्मिक चिह्न संसद भवन में लगाने से दूसरे धर्म के लोगों की भावनाएं आहत होंगी. संसद के भीतर सभी धर्मों के धर्म चिह्न लगाए जाने चाहिए. गृहमंत्री अमित शाह ने इसे राजनीति से ऊपर का मामला बताया है.

सेंगोल को भले सरकार राजनीति मुद्दा नहीं बनाने की बात कह रही हो, लेकिन जिस तरह इसकी एंट्री हुई है उससे सियासी चर्चा तेज है. सत्ता के गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या बीजेपी सेंगोल के जरिए तमिलनाडु की राजनीति साधने की कोशिश कर रही है? 

सियासत, सेंगोल और संसद उद्घाटन के राजनीति मायने को इस स्टोरी में विस्तार से जानते हैं...

पहले कहानी सेंगोल की

सेंगोल यानी राजदंड एक सिंबलजिसके ऊपरी सिरे पर नंदिनी विराजमान हैं. यह धन-संपदा और वैभव का प्रतीक भी है. तमिल परंपरा में सेंगोल राजा को याद दिलाता है कि उसके पास न्यायपूर्ण और निष्पक्ष रूप से शासन करने के लिए एक डिक्री है. 

सेंगोल का इतिहास मौर्य और गुप्त वंश काल से ही शुरू होता है, लेकिन यह सबसे अधिक चोल वंश शासन काल में चर्चित हुआ. भारत के दक्षिण भाग में चोल साम्राज्य (907 से 1310 ईस्वी) का शासन रहा. इस वंश में राजेंद्र चोल (प्रथम) और राजाराज चोल जैसे प्रतापी राजा हुए. 

तमिल साहित्य के इतिहास में चोल शासनकाल को स्वर्ण युग की संज्ञा दी जाती है. चोल राजाओं का राज्याभिषेक तंजौर, गंगइकोंडचोलपुरम्, चिदम्बरम् और कांचीपुरम् में होता था. उस वक्त पुरोहित राजाओं को चक्रवर्ती उपाधि के साथ ही सेंगोल सौंपते थे. 

चोल साम्राज्य में राजा ही सर्वोच्च न्याय अधिकारी होते थे. राजा विद्वानों और मंत्रियों के सहारे 2 तरह की सजा सुनाते थे. इसमें पहला, मृत्युदंड और दूसरा आर्थिक दंड. आर्थिक दंड में सोने के सिक्के लिए जाते थे. 

चोल साम्राज्य की स्थापना राजा विजयालय ने की थी. उन्होंने सत्ता में आने के लिये पल्लवों को हराया. मध्यकाल चोलों के लिए पूर्ण शक्ति और विकास का युग था. इसी दौरान चोल शासकों ने दक्षिण भारत के साथ-साथ श्रीलंका पर भी कब्जा जमा लिया था. 

कुलोतुंग चोल ने मजबूत शासन स्थापित करने के लिये कलिंग (ओडिशा) पर भी कब्जा कर लिया था. राजेंद्र चोल (तृतीय) इस राजवंश के अंतिम शासक थे.

चोल राजवंश के बाद दक्षिण की सत्ता में विजयनगर साम्राज्य स्थापित हो गया और धीरे-धीरे सेंगोल का इतिहास पुराना होता गया. आजादी के वक्त सेंगोल फिर से चर्चा में आया था. 

राजगोपालाचारी, नेहरू और सेंगोल

1946 के खत्म होते-होते यह तय हो गया था कि कभी भी ब्रिटिश की सत्ता भारत से समाप्त हो सकती है. वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया के बारे में पंडित नेहरू से जानकारी मांगी. 

माउंटबेटन ने नेहरू से पूछा कि ब्रिटिश सत्ता जब यहां से जाएगी, तो प्रतीक के रूप में आपको क्या सौंपा जाएगा? माउंटबेटन के सवाल का जवाब खोजने के लिए नेहरु ने राजगोपालाचारी की मदद ली. 

राजगोपालाचारी नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री रह चुके थे. राजगोपालाचारी ने काफी रिसर्च के बाद सेंगोल के बारे में नेहरू को बताया. सहमति बनने के बाद उस वक्त थिरुवावदुथुरई आधीनम् के तत्कालीन प्रमुख अंबलवाण देसिगर स्वामी को इसका भार सौंपा गया.

सेंगोल बनने के बाद देसिगर स्वामी ने अपने सहायक पुजारी कुमारस्वामी तंबीरन को सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिल्ली भेजा. 14 अगस्त 1947 को रात 11 बजे के बाद तंबीरन ने सेंगोल माउंटबेटन को दिया. 

माउंटबेटन इसके बाद सेंगोल पंडित नेहरू को सौंपा. मौजूद लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट से हॉल में गूंज उठा. तमिलनाडु से आए पुजारियों ने सेंगोल पर पवित्र जल छिड़का और श्लोक गायन के साथ इसका स्वागत किया. 

कुछ दिन बाद सेंगोल को प्रयागराज के म्यूजियम में रखने के लिए भेज दिया गया. तब से सेंगोल प्रयागराज के म्यूजियम में ही रखा है. पिछले साल तमिलनाडु महोत्सव के दौरान इसका जिक्र तेजी से छिड़ा था, जिसके बाद केंद्र सरकार एक्टिव हो गई. 

लोकसभा की 39 सीटों को साधने की रणनीति

कर्नाटक में हार के बाद से ही बीजेपी ने दक्षिण के तमिलनाडु और तेलंगाना पर फोकस बढ़ा दिया है. बीजेपी को 2024 के चुनाव में तमिलनाडु में बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद है. जयललिता के निधन के बाद ही वहां विपक्ष की कुर्सी खाली है. 

पार्टी की कमान तेजतर्रार अन्नामलाई के पास है. अन्नामलाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कन्याकुमारी से चुनाव लड़ने के संकेत भी दिए थे. अन्नामलाई ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय बाधा को पार कर लिया है.

कहा जा रहा है कि बीजेपी तमिलनाडु को लेकर कई रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में सेंगोल को तमिलनाडु की 39 सीटों को साधने के रूप में भी देखा जा रहा है. 

2019 में तमिलनाडु की 39 में से एक भी सीट बीजेपी नहीं जीत पाई थी. 2014 में बीजेपी को कन्याकुमारी सीट पर जीत मिली थी. हालांकि, 2019 में तमिलनाडु की 5 सीटों पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी, उनमें कोयंबटूर, शिवगंगा, रामनाथपुरम, कन्याकुमारी और थुटीकुड्डी सीट शामिल हैं. 

तमिलनाडु ही फोकस पर क्यों, 2 प्वॉइंट्स...

तमिलनाडु की सीमा दक्षिण भारत की 3 राज्यों की सीमा से लगी हुई है. इनमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल शामिल हैं. इन राज्यों में लोकसभा की 100 सीटें हैं, जिसमें से बीजेपी के पास सिर्फ 25 है.

जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु में विपक्ष पूरी तरह कमजोर पड़ गई है. बीजेपी को जड़ें जमाने के लिए यही आसान मौका दिख रही है. जयललिता की पार्टी के साथ बीजेपी का गठबंधन है.

सेंगोल से सधेगा द्रविड़ पॉलिटिक्स?

55 साल से तमिलनाडु की सत्ता में द्रविड़ पॉलिटिक्स का दबदबा है और द्रविड़ राजनीति करने वाली पार्टियों DMK और AIADMK की ही सरकार बनती है. अभी एमके स्टालीन के नेतृत्व में डीएमके की सरकार है. द्रविड़ पार्टियां केंद्र की सत्ता में भी दखल रखती है. 

1998 में जयललिता ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरा दी थी. 2004 और 2009 में करुणानीधि ने कांग्रेस को समर्थन देकर सबको चौंका दिया था.

तमिलनाडु में द्रविड़ पॉलिटिक्स की वजह से बीजेपी वहां जड़ें जमाने में अब तक कामयाब नहीं हुई है. हाल के वर्षों तक कांग्रेस का हाल भी काफी बुरा था. 

हाल ही में 2 विवाद ने तमिलनाडु में बीजेपी की मुश्किलें भी बढ़ा दी थी. पहला, भाषा और दूसरा तमिझगम का विवाद था. 

भाषा विवाद- अप्रैल 2022 में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा था कि अलग-अलग राज्यों के लोगों को एक दूसरे से अंग्रेजी की बजाय हिंदी में बात करनी चाहिए. शाह के इस बयान का तमिलनाडु में पुरजोर विरोध हुआ. 

सत्ताधारी दल डीएमके के कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर प्रदर्शन किया. खुद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अमित शाह के इस बयान को देश की एकता को तोड़ने वाला बताया.

स्टालिन ने कहा कि दिल्ली के लोग देश की विविधता खत्म करने की कोशिश कर रहे है, लेकिन हम इसे होने नहीं देंगे. तमिलनाडु में भाषा विवाद सालों पुराना है.

द्रविड़ आंदोलन के प्रणेता 1944 में पेरियार रामास्वामी ने तमिल को अलग राष्ट्रीय भाषा देने की मांग की गई थी. हालांकि, संविधान में हिंदी के साथ तमिल समेत कई भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया. 

इसके बाद हिंदी को जब राष्ट्रीय भाषा बनाने की बात कही गई तो 1960 के दशक में तमिलनाडु में उग्र प्रदर्शन हुए, जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने इसे रोक दिया. 

तमिझगम विवाद- तमिलनाडु में यह विवाद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि की ओर से शुरू किया गया. राज्यपाल ने एक कार्यक्रम में तमिलनाडु के बदले तमिझगम नाम रखने का सुझाव दिया था. 

रवि ने कहा था, तमिलनाडु का अर्थ होता है- तमिलों का देश या राष्ट्र, जबकि तमिझगम का मतलब है- तमिल लोगों को घर. राज्यपाल के इस बयान के बाद सत्ताधारी दल के नेता उबल पड़े और बीजेपी पर निशाना साधने लगे. 

द्रविड़ पॉलिटिक्स की वजह से 1967 में मद्रास का नामाकरण तमिलनाडु हुआ था. 

इन दोनों विवादों के बाद सेंगोल के राजनीतिक केंद्र में आने के बाद माना जा रहा है कि बीजेपी अपनी छवि तमिलनाडु में बदलने की कोशिश कर रही है, जिससे लोकसभा चुनाव में फायदा उठाया जा सके.

तमिलनाडु जनता की भावनाएं सेंगोल से जुड़ी हुई है. वहीं चोल वंश शासन काल को को तमिलनाडु के लोग स्वर्ण काल के रूप में याद करते हैं. कुल मिलाकर चोल राजवंश का भावनात्मक असर अभी भी तमिलनाडु में है.

ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी सेंगोल और चोल रावजंवश के मुद्दे को उठाकर कर तमिलनाडु में द्रविड़ पॉलिटिक्स को कुंद करने की रणनीति पर काम कर रही है.

4.नमक और चीनी कितना खाएं? दोनों में से दिल के लिए कौन ज्यादा है खतरनाक

मॉर्डन लाइफस्टाइल में लोगों को सेहत से जुड़ी दिक्कतें हो रही है. खासकर इस वक्त बढ़ता हुआ वजन सबसे बड़ी समस्या है. अगर इसे वक्त रहते कंट्रोल नहीं किया गया तो यह काफी ज्यादा दिक्कतें पैदा कर सकती है. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने डाइट पर कंट्रोल रखना होगा साथ ही आपको रोजाना चीनी-नमक की मात्रा का ध्यान रखना होगा. आपको देखना होगा कि चीनी और नमक किस तरह से सेहत को नुकसान और फायदा दोनों पहुंचाती है. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक व्यक्ति हर दिन 15 ग्राम नमक खाता है , लेकिन एक व्यक्ति को हर दिन सिर्फ 6 ग्राम ही नमक खाना चाहिए. सोडियम शरीर के लिए काफी ज्यादा जरूरी है लेकिन शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ने से  अस्थमा, सीन में जलन, अस्थि रोग, सूजन और हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत शुरू हो सकती है. 

नमक और चीनी दिल के लिए कौन ज्यादा है खतरनाक

चीनी किस तरह से दिल को करता है खराब

नेचुरल शुगर आपके लिए प्रोसेस्ड शुगर या आर्टिफिशियल स्वीटनर्स जितनी खराब नहीं होती हैं. जंक फूड जैसे- सॉफ्ट ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड जूस, कुकीज, कैंडीज और केक में जिस तरीके का रिफाइंड शुगर होता है वह आपके सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. जामा इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन्होंने ज्यादा चीनी खाई उन्हें दिल की बीमारी से मरने का जोखिम ज्यादा बढ़ गया है. इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि आप जितना भी चीनी खाएंगे इससे आपको दिल की बीमारी का खतरा बढ़ेगा. 

चीनी खाना भी है जरूरी है लेकिन अगर आप ज्यादा मात्रा में खाते हैं तो यह आपकी सेहत के लिए काफी ज्यादा खतरनाक है इसलिए चीनी ओवर इटिंग न करें. खासकर प्रोसेस्ड शुगर या आर्टिफिशियल स्वीटनर्स खाने से बचें.

नमक आपके दिल को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है

नमक में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है. इसलिए इसे अधिक मात्रा में या खाना के ऊपर से खाने से बचें. यह सिर्फ दिल के लिए ही नहीं पूरे शरीर के लिए भी बेहद खतरनाक है. एक जवान आदमी को हर दिन 1500 मिलीग्राम सोडियम खाना चाहिए. वहीं हर वयस्क व्यकित को हर दिन 5 ग्राम से कम नमक खाना चाहिए. नमक सोडियम का एकमात्र सोर्स नहीं है. ब्रेड, पिज्जा, सैंडविच, कोल्ड मीट, सूप, नमकीन स्नैक्स, चिकन, पनीर, ऑमलेट ये सब में सोडियम की मात्रा काफी अधिक होती है. 

सोडियम हमारी किडनी पर काफी ज्यादा बुरा असर डालता है. साथ ही ये शरीर में पानी भी हो सकता है. ये हाई ब्लड प्रेशर का कारण भी बन सकता है. 

5.रूस की धमकी कहीं नाराज हुए पुतिन तो कितना नुकसान होगा भारत का 

दुनिया में अगर किन्हीं दो देशों के बीच दोस्ती की मिसाल देनी हो तो भारत और रूस इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं। पिछले साल जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो आधी से अधिक दुनिया रूस के खिलाफ हो गई लेकिन भारत के साथ उसके संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन अब इस दोस्ती में दरार आती प्रतीत हो रही है। पश्चिमी देश रूस को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की 'ब्लैक लिस्ट' में शामिल कर आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने का प्रयास कर रहे हैं। रूस ने इसे लेकर भारत समेत अपने मित्र देशों से 'धमकीभरे लहजे में' मदद मांगी है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस ने भारत समेत अन्य देशों को धमकी दी है कि अगर उन्होंने एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट से बचने में उसकी मदद नहीं की तो वह डिफेंस और एनर्जी डील रद्द कर देगा। एफएटीएफ एक इंटर-गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन है जो 'अनुचित धन' से मुकाबला करने के लिए मानक तय करता है। पश्चिमी देश एफएटीएफ पर रूस को ब्लैक या ग्रे लिस्ट में शामिल करने का दबाव बना रहे हैं।

रूस की धमकी, खतरे की घंटी

एफएटीएफ ने फरवरी में रूस को निकाय की सदस्यता से सस्पेंड कर दिया था। दूसरी ओर यूक्रेन रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाने पर जोर दे रहा है। फिलहाल इस रिपोर्ट को लेकर भारत और रूस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन रूस की धमकी भारत के लिए खतरे साबित हो सकती है। अगर दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई तो इसका असर कई परियोजनाओं पर पड़ सकता है।

भारत को क्या होगा नुकसान?

अगर रूस एफएटीएफ में शामिल हुआ तो तेल कंपनी रोसनेफ्ट और नायरा एनर्जी लिमिटेड के बीच सहयोग पर असर पड़ेगा। भारत को रूसी हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्यात के साथ-साथ डिफेंस सेक्टर में तकनीकी सहयोग भी प्रभावित हो सकता है। रूस की धमकी फरवरी में एयरो इंडिया 2023 प्रदर्शनी में प्रस्तुत नए जॉइंट एविएशन प्रोजेक्ट के लिए रूसी प्रस्ताव, भारत में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहयोग और नॉर्थ-साउथ ट्रेडिंग कॉरिडोर के विकास से जुड़ी कार्गो परिवहन सेवाओं पर रूसी रेलवे के RZD Logistics और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौते के लिए खतरा पैदा करती हैं।

भारत के लिए नजरअंदाज करना होगा मुश्किल

अमेरिका और उसके सहयोगियों ने यूक्रेन में युद्ध के चलते रूस को दुनिया का सबसे प्रतिबंधित देश बना दिया है। प्रतिबंधों के माध्यम से पश्चिमी देश रूस पर पीछे हटने का दबाव बना रहे हैं। लेकिन मॉस्को ने अपनी अर्थव्यवस्था को लगे झटके को भारत और चीन जैसे देशों के साथ संबंध मजबूत करके काफी हद कम कर दिया है। अगर रूस एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में शामिल होता है तो भारत के लिए इसे नजरअंदाज करना और हमेशा की तरह उससे व्यापार जारी रखना कठिन होगा।


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