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22 March 2023: दिन की पांच बड़ी ख़बरें 'Top 5 News Of The

 1. कोविड 19 के बढ़ते मामलों के बीच पीएम मोदी ने की समीक्षा बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 की स्थिति और जन स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारियों पर बुधवार (22 मार्च) को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीन पवार, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, आईसीएमआर के राजीव बहल, नीति आयोग से वीके पॉल, गृह सचिव अजय भल्ला, पीएमओ के अधिकारीऔर अन्य मौजूद रहे. देश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. बुधवार की सुबह स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 1134 नए मामलों की पुष्टि हुई है. इसके बाद एक्टिव मामलों की संख्या 7026 हो गई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक कोविड-19 के 4 करोड़ 46 लाख 98 हजार 118 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. बीते दिन मंगलवार (21 मार्च) को दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दक्षिण राज्य केरल में कोरोना महामारी की वजह से एक-एक मरीज की मौत हुई. इसके बाद अब तक कोविड से मरने वालों की संख्या 5 लाख 30 हजार 813 पर पहुंच गई.

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डेली पॉजिटिव रेट इस समय 1.09 फीसदी तो वीकली पॉजिटिव रेट 0.98 प्रतिशत है. कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. देश में अब रिकवरी रेट बढ़कर 98.79 फीसदी पहुंच गया है. जबकि मृत्यु दर 1.19 फीसदी पर बरकरार है. वहीं सक्रिय मामलों में कुल संक्रमणों का 0.01 प्रतिशत शामिल है. मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक करीब कोविड-19 रोधी टीकों की 220.65 करोड़ खुराक दी जा चुकी है.

मंगलवार को देश में कोरोना के 699 नए मामले आए थे, जबकि इस दौरान 2 लोगों की मौत हुई थी. यानि मंगलवार के मुकाबले बुधवार को देश में कोरोना के 435 ज्यादा नए केस सामने आए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 662 लोगों ने कोरोना को मात दी है. नए केस आने के बाद देश में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 7026 हो गई है. इस तरह पिछले 24 घंटे में एक्टिव केस की संख्या में 466 की तेजी दर्ज की गई है.


2.दिल्ली में PM Modi के खिलाफ 'आपत्तिजनक' पोस्टर, 100 FIR और 6 गिरफ्तार, जानिए क्या है AAP का कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के आपत्तजिनक पोस्टर लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने 100 प्राथमिकी दर्ज की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन पोस्टरों पर लिखा था, "मोदी हटाओ-देश बचाओ." दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी दीपेंद्र पाठक ने बताया कि पूरे शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए, जिसको लेकर अब तेजी से कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि इन (आपत्तिजनक) पोस्टरों में प्रिंटिंस प्रेस की जानकारी नहीं है. स्पेशल सीपी दीपेंद्र पाठक ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि अब तक 6 लोगों की गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि इन पोस्टरों का लिंक आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ है. दीपेंद्र पाठक ने बताया कि आम आदमी पार्टी के कार्यालय से निकलते ही वैन को पुलिस ने रोका था, जिसमें से कई पोस्टर जब्त किए गए और मौके पर कुछ गिरफ्तारियां भी की गईं. उन्होंने कहा कि प्रिटिंग प्रेस अधिनियम और संपत्ति विरूपण अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

पूरे शहर से हटाए गए हजारों पोस्टर

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे दिल्ली शहर से करीब 2000 पोस्टरों को हटाया गया है. स्पेशल सीपी दीपेंद्र पाठक ने बताया कि 'आप' कार्यालय से निकलते हुए जिस वैन को रोका गया उससे एक शख्स को गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि उसके मालिक ने उसे यहां पर पोस्टरों की डिलीवरी के लिए कहा था. दीपेंद्र पाठक ने कहा कि उसने एक दिन पहले भी पोस्टरों की डिलीवरी की थी.

इतने पोस्टरों का दिया था ऑर्डर

पुलिस के मुताबिक, दो प्रिंटिंग प्रेस फर्मों को 50-50 हजार पोस्टर बनाने का ऑर्डर दिया गया था और कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों ने रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक पोस्टरों को अलग-अलग इलाकों में लगाया. अपने प्रिंटिंग प्रेस का नाम पोस्टरों पर प्रकाशित नहीं करने के आरोप में मालिकों को गिरफ्तार किया गया है.

डीसीपी (नॉर्थवेस्ट) जितेंद्र मीणा ने जिले में 20 प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है. एक अधिकारी ने कहा, "ज्यादातर प्राथमिकी सार्वजनिक संपत्ति विरूपण अधिनियम और प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के तहत दर्ज की गईं." 

3. जल्द 6G की दुनिया में भारत रखेगा कदम, आज पीएम मोदी 6G विजन डॉक्यूमेंट करेंगे जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 12:30 बजे विज्ञान भवन में एक प्रोग्राम में शामिल होंगे. यहां पर पीएम नरेंद्र मोदी भारत में नए इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के एरिया ऑफिस और इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम के दौरान, प्रधान मंत्री भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट के बारे में बताएंगे और 6G R&D टेस्ट बेड को लॉन्च करेंगे. PMO की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह 'कॉल बिफोर यू डिग' एप भी लॉन्च करेंगे और इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे.

ITU क्या है? 

ITU संयुक्त राष्ट्र की सूचना और संचार टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के लिए विशेष एजेंसी है. इस एजेंसी का हेडक्वार्टर जिनेवा में है. इस एजेंसी का फील्ड ऑफिस, रीजनल ऑफिस और एरिया ऑफिस का एक नेटवर्क है.  भारत ने एरिया ऑफिस की स्थापना के लिए आईटीयू के साथ मार्च 2022 में हाथ मिलाया था.

भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट को किसने तैयार किया?

भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट 6G (TIG-6G) को टेक्नोलॉजी इनोवेशन ग्रुप ने तैयार किया है, जिसका गठन नवंबर 2021 में विभिन्न मंत्रालयों / विभागों, रिसर्च और डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, एकेडमिक, मानकीकरण निकायों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर और इंडस्ट्री के सदस्यों के साथ रोडमैप विकसित करने और 6G की प्लानिंग करने के लिए किया गया था. 6जी टेस्ट बेड अकादमिक संस्थानों, इंडस्ट्री, स्टार्ट-अप्स, MSMEs आदि को उभरती आईसीटी टेक्नोलॉजी का टेस्ट और वेरिफिकेशन करने के लिए एक प्लेटफार्म ऑफर करेगा. भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट और 6G टेस्ट बेड देश में न्यू इनोवेशन और तेजी से टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए एक सक्षम वातावरण देगा.

कब लॉन्च होगा 6G ?

गौरतलब है कि 6G का कमर्शियल रोलआउट अभी सालों दूर है. कहा जा रहा है कि 6G को 2028 या 2029 के कुछ समय बाद ही शुरू किया जा सकता है. फिलहाल 5G पर दुनियाभर में कई जगहों पर टेक्नोलॉजी काम कर रहे है. भारत ने भी 2022 के अंत से अपनी 5G सर्विस शुरू कर दी है, और दूरसंचार कंपनियां यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं कि भारत का 5G रोलआउट दुनिया में सबसे अच्छा हो. Airtel और Jio दोनों ही अपने कस्टमर्स को अनलिमिटेड 5G ऑफर कर रही हैं. कंपनीयों ने अगले साल तक 5G के साथ पूरे देश को कवर करने का लक्ष्य बनाया हुआ है.


4. Amritpal Case: क्या है Habeas Corpus, जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार को जारी कर दिया नोटिस

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रविवार (19 मार्च) को पंजाब सरकार को  को एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) पर नोटिस जारी किया. याचिकाकर्ता इमान सिंह खारा ने आरोप लगाया कि 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पंजाब पुलिस ने अवैध रूप से गिरफ्तार किया है और उन्हें अभी तक कोर्ट में पेश नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता ने खंडपीठ को ये भी बताया कि वो संगठन 'वारिस पंजाब दे' और अमृतपाल सिंह का कानूनी सलाहकार है. चलिए अब आपको बताते हैं कि हेबियस कॉर्पस याचिका आखिर क्या होती है?भारत का संविधान देश के किसी भी नागरिक को पूरी स्वतंत्रता के साथ रहने और कानून के मुताबिक जीने का अधिकार देता है, अगर किसी वजह से इनके साथ छेड़छाड़ हो तो वो व्यक्ति कानून या अदालत की मदद ले सकता है. ऐसे ही वक्त में हेबियस कॉर्पस काम आता है. हेबियस कॉर्पस लैटिन भाषा का शब्द है, इसका अर्थ होता है 'सशरीर', लेकिन कानूनी तौर पर इसका इस्तेमाल किसी ऐसे व्यक्ति की रिहाई के लिए किया जाता है, जिसे गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया हो या गिरफ्तार किया गया हो. हिंदी में इसे बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका कहते हैं. ये गैर-कानूनी रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है.

भारत के संविधान में इसकी क्या व्यवस्था है?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 22 कहता है, अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है तो उसे गिरफ्तार करने की वजह बताए बिना पुलिस कस्टडी में नहीं रखा जा सकता. साथ ही उसे अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और अपना बचाव करने के अधिकार से भी वंचित नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है या कस्टडी में रखा गया है तो उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना जरूरी है. ऐसे किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के प्राधिकार के बिना पुलिस कस्टडी में नहीं रखा जा सकता.

हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में कर सकते हैं अपील

यहां पर अगर किसी व्यक्ति को ऐसे लगता है कि उसे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है तो वो हेबियस कॉर्पस की मदद ले सकता है. हेबियस कॉर्पस गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को या उसके परिजनों को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में अपील करने का भी अधिकार देता है. 

इस याचिका के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को कोर्ट के सामने पेश करने और उसे हिरासत में रखने की वजह की मांग की जा सकती है. यानी अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है या कस्टडी में रखती है तो उस व्यक्ति की ओर से हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की जा सकती है.

5. नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन पर क्यों लगा जमीन कब्जा करने का आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला?


विश्वभारती विश्वविद्यालय ने नोबेल अवॉर्डी अमर्त्य सेन को 13 डिसमिल जमीन खाली करने को लेकर नोटिस भेजा है. विश्वभारती विश्वविद्यालय की तरफ से अमर्त्य सेन को 3 दिन के भीतर दूसरा नोटिस भेजा गया है. इस नोटिस में अमर्त्य सेन को तुंरत जमीन खाली करने को कहा गया है. प्रबंधन का आरोप है कि सेन के पास उनके हिस्से से ज्यादा जमीन है  इसलिए ये जमीन सेन को तुरंत लौटा देना चाहिए. 
प्रबंधन का कहना है कि वो ज्यादातर अमेरिका में रहते हैं तो शांति निकेतन परिसर में जमीन के अवैध कब्जे को खाली कर दें.  इस नोटिस में अमर्त्य सेन को 24 मार्च तक नोटिस का जवाब देने और 29 मार्च को यूनिवर्सिटी के ज्वाइंट रजिस्ट्रार के सामने पेश होने को भी कहा गया है.

यूनिवर्सिटी का आरोप है कि उन्होंने एक जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया है. नोटिस जारी कर सेन से ये भी पूछा गया है कि जमीन को खाली नहीं करने पर उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों नहीं जारी किया जाए. 

नोटिस में कहा गया है, "अगर आप और आपके अधिकृत प्रतिनिधि दी गई तारीख पर पेश नहीं होते हैं तो ये समझा जाएगा कि आप जानबूझकर नोटिस का जवाब नहीं देना चाहते और आपके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी." 


बता दें कि 89 वर्षीय सेन, फिलहाल अमेरिका में रहते हैं और अभी तक उनके या उनके परिवार की तरफ से नोटिस को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है. यूनिवर्सिटी का दावा है कि शांति निकेतन परिसर में अमर्त्य सेन के पास कानूनी रूप से 1.25 एकड़  की जमीन ही है. लेकिन अमर्त्य सेन ने कुल 1.38 एकड़ जमीन पर कब्जा किया हुआ है. 

इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने शांति निकेतन में स्थित 1.38 एकड़ जमीन के पट्टे के अधिकार को नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के नाम कर दिया है. इस सिलसिले में बीरभूम जिला मजिस्ट्रेट बिधान रे ने कहा कि "हमने अमर्त्य सेन को उनके पिता आशुतोष सेन के कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में भूमि के अधिकार सौंप दिए हैं. ऐसे में अब अनधिकृत कब्जे का सवाल ही नहीं उठता . हमने सेन की तरफ से पेश किए गए कागजात की जांच के बाद ही ये कदम उठाया है. इस जांच में विश्व भारती के अधिकारी भी मौजूद थे'. 


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