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रूस से तेल और गैस निर्यात रुका तो दुनिया पर होगा बड़ा असर, बढ़ेगी बेहतहाशा महंगाई



यूक्रेन पर हमले के बाद लगाई गई पाबंदियों की वजह से रूस की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सिस्टम और उसकी मुद्रा पर भारी दबाव है। ऐसे में अब अमेरिका द्वारा रूस से कच्चे तेल, कई पेट्रोलियम उत्पादों, तरल प्राकृतिक गैस और कोयले के आयात पर रोक लगा दी गई है।


वहीं, प्रतिबंधों से नाराज रूस ने भी जर्मनी को धमकी दी है कि वह गैस आपूर्ति रोक सकता है। ऐसे में रूस से प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का निर्यात अगर बंद हो जाए, तो आने वाले समय में दुनियाभर के देशों पर इसका खासा असर होगा। साथ ही संकट से जूझने वाले देशों में भारत भी शामिल होगा, क्योंकि भारत भी रूस से क्रूड ऑयल मंगाता है।

 दुनिया भर में तेल के दाम साल 2008 के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच चुके हैं। सोमवार को कच्चे तेल के दाम 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि रूसी तेल को खारिज कर देने से वैश्विक बाजार पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे। उनका कहना है कि कच्चे तेल के दाम दोगुने होकर 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं, जिससे दुनियाभर में बेतहाशा महंगाई बढ़ेगी।

रूस से पाइपलाइन के जरिए जर्मनी गैस पहुंचती है। बीते महीने जर्मनी ने दूसरी गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम 2 के सर्टिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। जिस पर रूसी नेता नोवाक ने कहा था कि हमारे पास भी मिलते-जुलते फैसले लेने का अधिकार है। हम भी नॉर्ड स्ट्रीम 1 गैस पाइपलाइन से निर्यात रोक सकते हैं।

हालांकि भारत, रूस से काफी कम तेल आयात करता है और अपनी जरूरत का 70 फीसदी कच्चा तेल ‘ओपेक’ देशों से खरीदता है। 2021 में भारत ने हर रोज 42 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया था, जो कोविड से पहले के आयात की तुलना में कम है। भारत अपने कुल आयात का तीन से चार प्रतिशत कच्चा तेल ही रूस से लेता है। लेकिन कुछ खास उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भारत की रूस पर निर्भरता काफी अधिक है।


फैक्ट फाइल


10 प्रतिशत सिर्फ रूस से ही आता है दुनिया की कुल सप्लाई का तेल।

40 प्रतिशत गैस और 30 प्रतिशत तेल निर्यात करता है रूस, यूरोपीय संघ को अपने उत्पादन का।

70 से 80 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन रूस हर रोज करता है।

8,500 अरब क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस सालाना रूस निर्यात करता है।

83 फीसदी तक भारत अपनी कुल तेल जरूरत का आयात से पूरा करता है।

03 से 04 प्रतिशत कच्चा तेल ही भारत अपने कुल आयात का रूस से लेता है।

2008 के बाद सबसे उच्चतम स्तर 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुके हैं कच्चे तेल के दाम।

इसलिए यूरोप ने नहीं लगाया प्रतिबंधवैश्विक ऊर्जा बाजार में रूस की बड़ी भूमिका होने के कारण सोमवार को जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्ट्ज ने रूस के तेल और गैस पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने के विचार को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था इस समय ऊर्जा सप्लाई को किसी अन्य तरीके से बचाया नहीं जा सकता है। यूरोप के देशों को तेल के मुकाबले गैस की जरूरत सबसे अधिक होती है और यूरोपीय संघ अपनी गैस का 61 फीसदी आयात करता है, जिसमें से 40 फीसदी गैस रूस से ही आती है।


यूरोपीय संघ का रूस से आयात कितना


अमेरिका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का 10 प्रतिशत रूस से ही आता है। रूस हर रोज 70 से 80 लाख बैरल कच्चा तेल और 8,500 अरब क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस सालाना निर्यात करता है। इसमें से अधिकतर हिस्सा यूरोप के हिस्से में जाता है। रूस यूरोपीय संघ को 40 प्रतिशत गैस और 30 प्रतिशत क्रूड ऑयल का निर्यात करता है।


विकल्प की तलाश में ईयू के नेता करेंगे बैठक


वहीं, अब यूरोप रूस पर गैस, कोयले और तेल निर्भरता को कम करने के लिए अलग रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है। रूस पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय संघ के नेता गुरुवार और शुक्रवार को बैठक करेंगे। एक बयान में यूरोपीय संघ के नेताओं ने कहा है कि ‘यह यूरोपीय इतिहास में एक नए इतिहास बनने का दौर है’। इसके तहत साल 2030 तक विकास और निवेश के नए मॉडल विकसित करने के साथ-साथ ऊर्जा की सप्लाई और रूट्स को विविध करने पर जोर दिया जाएगा।


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